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Bhaagwat Geeta Ke Anusaar Drwtao Ki Puja Karna Galat (SHIRK) Hai-GEETA AUR QURAN



                   आइये सबसे पहले जानते है कि देवता किसे कहते है ?

                        और किस प्रकार इनकी पूजा करना गलत है ?

1.भागवत गीता अध्याय 8 श्लोक 1 .

2.भागवत गीता अध्याय 8 श्लोक 4


इस श्लोक के अनुसार क्षर यानी नश्वर प्रकृति जिसमे सारे जीव मौजूद है भौतिक जगत (अधिभूत )
 कहलाती है  और प्रकृति के स्वरूप जैसे सूर्य, चन्द्र,हवा,जल इत्यादि  देवता कहलाते है जो पुरुष (अधिदैव)
यानी भगवान् के अन्दर मौजूद रहते है

भागवत गीता अध्याय 7 श्लोक 20


इस श्लोक के अनुसार जो लोग देवताओं के शरण में जाते है वे नष्ट होने वाली भौतिक वस्तुओ की कामना करते है और अलग अलग देवताओ की अलग अलग इच्छा के कारण अलग अलग  विधि से उनकी पूजा करते है 

भागवत गीता अध्याय 7 श्लोक 22 


भगवान्  कहते है कि भले ही इंसान विभिन्न इछाओं की पूर्ति के लिए विभिन्न देवताओ की पूजा करते है 
लेकिन उनकी  सारी इच्छाओ की  पूर्ति ईश्वर द्वारा की जाती है|  इससे पता चलता है कि लोग जिन देवताओ को पूजते है उन देवताओ के पास इच्छा पूर्ति के लिए खुद की शक्ति नही होती है बल्कि वे ईश्वर पर निर्भर करते है | भागवत गीता अध्याय 7 श्लोक 23 


अल्पबुद्धि यानी जिनमें ज्ञान की कमी है या जो कम जानकार है ,वे ही देवताओ पूजा करते है,
वे नहीं जानते कि उनसे प्राप्त होने वाला फल तय समय में ही समाप्त हो जाते है|
जो देवताओ की पूजा करते है ,वे देवलोक यानी सूर्य को पूजने वाले सूर्य में ,चन्द्र को पूजने वाले चन्द्र में ,आग को पूजने वाले आग में ,जल को पूजने वाले जल में मिल जाते है,जबकि ईश्वर को पूजने वाले बैकुण्ड लोक को जाते है |

भागवत गीता अध्याय 9 श्लोक 23.


यहाँ पर अविधिपूर्वकम शब्द का प्रयोग हुआ है यानि गलत तरीका से|जो लोग देवताओ की
पूजा करते है वास्तव में वे ईश्वर की पूजा करते है , लेकिन वे इसे विधि पूर्वक नहीं करते हैं अर्थात
 गलत तरीके (शिर्क तरीके) से पूजते है |लोग जब देवताओ से मांगते है और उनकी इच्छाओ की पूर्ति 
होती है तो वे समझते है उन्ही से प्राप्त हो रहा है,वे वास्तविक सच्चाई को नहीं जानते |इस प्रकार ईश्वर
की जगह वे देवताओ को रख देते है.यह समझना कि ईश्वर से भी मिलता और देवताओ से भी मिलता है
यानि आपने ईश्वर की तुलना देवताओ से की जो कि शिर्क (गलत) है |

अगले POST में हम देखेंगे की ईश्वर की भौतिक जगत में   आकार का रूप देकर उनकी पूजा करना सही है या नहीं TO BE CONTINUE








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