Bhaagwat Geeta Sanatan (HINDU) Dharmiyo Ke Liye Ishwar Ki Upasna Karne Ka Tarika-GEETA AUR QURAN
BHAAGWAT GEETA ME SANATAN (HINDU) DHARMIYO KE LIYE ISHWAR KI UPASNA KARNE KA TARIKA
हिन्दू या सनातन धर्म के लोग यह सोचते है की वे जिस प्रकार से इश्वर की उपासना करते है वो तरीका सही है
जबकि वे सास्त्र विधि से उनकी उपासना नही करते है| आइये देखते है की भगवान् श्री कृष्ण ने अर्जुन को कौन सा तरीका बताया |
पहली विधि---- भागवत गीता अध्याय 5 श्लोक 27,28.
सबसे पहले तो किसी भी विषय के बारे में सोचना बंद
दे,ऑंखें बंद करके दृष्टि को भौहों के मध्य केन्द्रित करे
फिर अपान वायु को (साँस का नीचे जाना) नाक में रोककर मन,इन्द्रिय तथा विचार को शांत करे परमेश्वर का ध्यान करते हुए मोक्ष को लक्ष्य बनाये|
इससे इन्सान को भौतिक वस्तुओ के प्रति इच्छा की कमी , क्रोध में कमी तथा घबराहट दूर होती है और अंत में वह मोक्ष को प्राप्त होता है |
दूसरी विधि---------
1. भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 1
हिन्दू या सनातन धर्म के लोग यह सोचते है की वे जिस प्रकार से इश्वर की उपासना करते है वो तरीका सही है
जबकि वे सास्त्र विधि से उनकी उपासना नही करते है| आइये देखते है की भगवान् श्री कृष्ण ने अर्जुन को कौन सा तरीका बताया |
पहली विधि---- भागवत गीता अध्याय 5 श्लोक 27,28.
सबसे पहले तो किसी भी विषय के बारे में सोचना बंद
दे,ऑंखें बंद करके दृष्टि को भौहों के मध्य केन्द्रित करे
फिर अपान वायु को (साँस का नीचे जाना) नाक में रोककर मन,इन्द्रिय तथा विचार को शांत करे परमेश्वर का ध्यान करते हुए मोक्ष को लक्ष्य बनाये|
इससे इन्सान को भौतिक वस्तुओ के प्रति इच्छा की कमी , क्रोध में कमी तथा घबराहट दूर होती है और अंत में वह मोक्ष को प्राप्त होता है |
दूसरी विधि---------
न की उस साधू या सन्यासी को जो केवल ख़ास प्रकार का वस्त्र धारण किये हुए होते है |
2. भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 10 .
इस श्लोक में भगवान् ने मन को वश में कर शारीर, मन तथा आत्मा को इश्वर में
ध्यान लगाने की बात कही.
3. भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 12
इस श्लोक में साधक को स्थान का ध्यान रखने की बात कही गयी है | साथ
ही साधक साधना करते समय यह ध्यान रखे की वह यह न सोचे की इसके बाद
इस श्लोक में यह बताया गया है की साधक ईश्वर का ख्याल कर उसे ही पाने की चाह रखे इस प्रकार ईश्वर का ध्यान करते समय यदि मन कहीं और भटकने लगे तो उसे किस प्रकार नियंत्रित करे आइए आगे की श्लोक में देखते है |
5. भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 25 और 26
भागवत गीता अध्याय 2 श्लोक 58.
मन की चंचलता को निरंतर अभ्यास द्वारा ही बस में किया जा सकता है |
6.इस श्लोक से देखे अध्याय 6 श्लोक 35 .
इस प्रकार ईश्वर का ध्यान करने से आपको लाभ क्या होगा आइये इन श्लोको से देखें
7. भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 46 .

8 . भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 15
तीसरी विधि-----
भागवत गीता अध्याय 8 श्लोक ११.
भागवत गीता अध्याय 8 श्लोक 12.
भागवत गीता अध्याय 8 श्लोक 13.
भागवत गीता अध्याय 8 श्लोक 14.
अब आप अगले POST में देखेंगे की भागवत गीता में ईश्वर की जगह देवताओ की पूजा करना
गलत (शिर्क ) है|
TO BE CONTINUE..............
5. भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 25 और 26
भागवत गीता अध्याय 2 श्लोक 58.
मन की चंचलता को निरंतर अभ्यास द्वारा ही बस में किया जा सकता है |
6.इस श्लोक से देखे अध्याय 6 श्लोक 35 .
इस प्रकार ईश्वर का ध्यान करने से आपको लाभ क्या होगा आइये इन श्लोको से देखें
7. भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 46 .

8 . भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 15
तीसरी विधि-----
भागवत गीता अध्याय 8 श्लोक ११.
भागवत गीता अध्याय 8 श्लोक 12.
भागवत गीता अध्याय 8 श्लोक 13.
भागवत गीता अध्याय 8 श्लोक 14.
अब आप अगले POST में देखेंगे की भागवत गीता में ईश्वर की जगह देवताओ की पूजा करना
गलत (शिर्क ) है|
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